आप जिस वक़्त इस कहानी की अगली दो लाइनों को पूरा पढ़कर ख़त्म करेंगे, तब तक भारत में एक मां अपने पेट में नौ महीने तक पाले हुए बच्चे को पैदा होने के साथ ही हमेशा के लिए खो चुकी होगी.
भारत में हर 55 सेकेंड में एक औरत मरे हुए बच्चे को जन्म देती है.
मेडिकल जर्नल लेंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में हर रोज़ 1622 बच्चे मरे हुए पैदा होते हैं. पूरी दुनिया में भारत 'स्टिलबर्थ' के मामले में सबसे आगे है. 'स्टिलबर्थ' का मतलब है, बच्चा गर्भ में नहीं बल्कि पैदा होने के बाद मर जाता है. प्रेग्नेंसी के 20 हफ़्ते तक अगर भ्रूण की मौत होती तो इसे मिसकैरेज कहते हैं. इसके बाद भ्रूण की मौत को 'स्टिलबर्थ' कहा जाता है.
2015 तक के आंकड़ों की मानें तो हर साल भारत में स्टिलबर्थ के पांच लाख 92 हज़ार मामले होते हैं. पूरी दुनिया में हर साल 26 लाख मरे हुए बच्चे पैदा होते हैं.
अपने बच्चे को खोने का दर्द दुनिया के किसी भी हिस्से की मां के लिए शायद एक जैसा ही होता है. ये कहानी एक ऐसी ही मां की है. बीबीसी पत्रकार फियोना क्रैक पिछले साल प्रेग्नेंट हुईं थीं. वो बिटिया को जन्म देने वाली थीं. लेकिन उनकी भ्रूण वाली थैली फट गई और उस पानी के साथ वो सारे सपने बह गए जो फियोना मे अपनी बेटी को लेकर देखे थे.
मैं बिना बच्चे वाली मां हूं...
जब मैं आठ साल की थी, तब मेरी बहन को बच्चा हुआ था. मेरी मां जानती थी कि मुझे बच्चे अच्छे लगते हैं. उन्होंने मुझे कुछ दिनों के लिए बहन के घर भेज दिया ताकि मैं थोड़ी मदद कर सकूं.
मैंने शायद मदद वाला काम अच्छे से किया था. तभी जब मेरी दूसरी बहन मां बनी तो मुझे वहां भी भेजा गया.
मैं बच्चे को ऊपर-नीचे घुमाती. नासमझी में चिढ़ने वाले बड़े भाई-बहनों से नए मेहमान को बचाकर रखती.
मैंने अपनी पड़ोसन की भी मदद की. गांव के बच्चों को संभालने के लिए मैं खुद के 12 साल के होने का इंतज़ार नहीं कर सकती थी. 'मैं मां बनूंगी' ये इंतज़ार मुझसे हो नहीं पाता था.
जब मैं 29 साल की हुई तो मुझे सर्वाइकल कैंसर हो गया. मेरी ज़िंदगी बचाने के लिए जो ऑपरेशन किया गया, उसने मां बनने की मेरी संभावनाओं को ख़त्म कर दिया.
एक मेडिकल रिसर्च पेपर में मैंने पढ़ा कि एक दूसरा ऑपरेशन मेरी उम्मीदों को एक मौका दे सकता है.
मैंने एक डॉक्टर को खोजा, जो यह ऑपरेशन कर सकते थे. मैंने एक रेफरेंस भी खोजा. वह काम नहीं आया तो मैं खुद उनसे मिलने चली गई.
आईवीएफ (IVF) के बाद कई बार मेरा मिसकैरिज हुआ.
...और फिर एक सुबह मैं जिस बच्ची के ख़्वाब बुन रही थी, वह मेरे अंतिम अल्ट्रासाउंड स्कैन में दिख गई.
अस्पताल की नर्सों ने मुझे घेर लिया और होने वाले बच्चे के लिए बधाइयां दीं.
उस दोपहर मैं ऑफिस में थी. एक सहकर्मी के नौकरी छोड़ने के मौके पर मैं एक केक खा रही थी. मैंने महसूस किया कि कोई गर्म चीज़ मेरी ट्राउजर को गीली कर रही है. मेरे गर्भाशय से पानी (एम्नियॉटिक फ्लूड) दो महीने पहले ही बाहर आ रहा था.
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