Wednesday, January 23, 2019

达沃斯论坛是甚么?十个重点告诉你

近50年来,每年1月份,世界领袖、大企业老板和一众名流明星,也会齐集在瑞士一个小镇,出席达沃斯世界经济论坛。

达沃斯为何有如此吸引力?他们为何都要前往这个论坛?你只要掌握以下十个事实,当别人说起达沃斯时,你都可以自信地点头,显示你对讨论的内容了如指掌。

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虽然现在大家都称这个论坛为达沃斯,但这个1月举行的会议是年度世界经济论坛,达沃斯只是举办这场活动的那家酒店的名称。

当这个小镇被视为等同这场眩目的会议,许多其他活动也希望利用这个名字进行宣传,动不动就把一系列会议挂上达沃斯招牌。

去年一个沙特投资峰会称会议为“沙漠上的达沃斯”,但当时刚巧是沙特记者贾玛尔‧卡舒吉(Jamal Khashoggi)死亡引发连串争议之时,世界经济论坛作出反制,主办单位对外警告会用尽方法去保护达沃斯这个品牌。以免被不当使用。

世界经济论坛是一个非弁利组织,不过有一个远大的目标,试图改善世界现状。

每年的聚会都有正式会议,包括无数的演说和环节,讨论不同的议题,从全球经济形势到压力管理等等。

但事实上,出席者都不是为了参加这些环节,而是不断去交际联谊,建立人际网络。

为期4天的会议,出席者一同留在相对较小的环境里,企业老板、政客和记者可以在短时间内进行无数的会面,不用受限于交通往来的时间。

这些交际活动由每天的饭局、相约喝一杯和派对,一直进行到深夜,许多企业也会举行这些活动。

论坛创办人克劳斯‧施瓦布(Klaus Schwab)1971年开始举办这个年度活动,首年是讨论国际管理措施,现在世界经济论坛有更多议题,但有人批评这只是一个只说不做的地方。

但达沃斯把出席者放在一起,容许政客可以在公众视野以外有一个难得的会面机会。

朝鲜和韩国在1989年,就是在达沃斯进行了首场部长级会议。去年,希腊总理和马其顿共和国总理举行了7年来首度面对面的会晤,铺路解决持续27年的马其顿国名争议。

4. 企业参加费用高昂
达沃斯的参加者中唯一要付费的是企业,其他出席者均是免费受邀。企业需要支付的基本收费为每人2.7万瑞士法郎(约2.09万英镑)。但事实上不仅如此,另一成本是参加者需要是世界经济论坛的成员,论坛的会员制度规定,基本会员每年至少需要缴交6万瑞士法郎会费,再贵一点可以成为“战略伙伴”,所需金额为60万瑞士法郎。

这是一门费用高昂的生意,但那些顶级会员可以与同行举行私人会晤,而且不会像老百姓那样徒步走过冰天雪地,他们有专用汽车和私人司机。有些人会认为是物有所值。

解决不平等问题是达沃斯经济讨论的话题,但世界经济论坛却有一个非常不平等的复杂系统,用不同颜色的名牌把出席者分类。

是的,你可能和新西兰总理及英国威廉王子一同身处在论坛,但你在洗手间碰到他们的机会极低。

这些头等客人有白色的名牌,上面有他们的照片,让他们可以出入任何地方,包括一些专员的特别会面场所。

出席者的伴侣和记者均有不同颜色的名牌,有不同的出入权限,最低层次的是酒店名牌,你连会议中心都进不去,不过可以出席晚上的派对,或者去滑雪,无疑也是一个好名牌

Monday, January 7, 2019

मेघालय: जो लोग अवैध खदान में फंसे हैं, उनके परिवार किस हाल में हैं

फिर ख़बर आई कि जो 15 लोग कसान के अवैध कोयला खदान में पानी भरने से पिछले 13 दिसंबर से फंसे हुए हैं, उनमें ये सात लोग भी हैं. गाँव के लोग परेशान हैं क्योंकि जिस जगह ये लोग काम करने गए थे वो मागुरबारी से लगभग 850 किलोमीटर दूर है.

फंसे हुए लोग किस स्थिति में है, इतने दिन बाद भी सरकारी मशनरी इस बात का पता नहीं लगा पाई है.

इनकी ख़ैर ख़बर लेने गाँव के कुछ लोग घटनास्थल पर जाते रहते थे, लेकिन अब उनका सब्र भी जवाब दे जा रहा है. अचानक आई इस विपदा से यहाँ के लोग समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन खदान में फंसे सात लोगों के परिवार अभी भी उनकी वापसी के सपने देख रहा है. पिछले 13 दिसंबर से वो जिस 'अच्छी ख़बर' की आस लगाए बैठे हैं, अब उस पर तेज़ी से नाउम्मीदी का साया मंडराने लगा है.

मेघालय की इन अवैध खदानों में 'रैट होल माइनिंग' के ज़रिये कोयला निकाला जाता है.

राज्य सरकार पर आरोप है कि उसने रहत और बचाव कार्यों को शुरू करने में काफ़ी देर कर दी.

मागुरमारी के लोग परेशान हैं क्योंकि अब खदान में पानी भरे कई दिन बीत चुके हैं लेकिन राहत दल फंसे हुए मज़दूरों तक पहुँचने में नाकाम रहा है. कोल इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक जुगल बोरा कहते हैं कि इन इलाक़ों के कोई मैप नहीं हैं इसलिए बचाव कार्यों में परेशानियां आ रही हैं.

मागुरमारी गाँव के दो भाई उमर अली और शराफ़त अली का परिवार उनका इंतज़ार कर रहा है. इस घर में सिर्फ़ औरतें और बच्चे ही रह रहे हैं क्योंकि कमाने वाले लोग तो 850 किलोमीटर दूर ज़मीन के कई फीट नीचे फंसे हुए हैं.

उमर अली की पत्नी सेपाली बेगम कहती हैं कि गाँव में ही रहने वाला एक माइनिंग सरदार उनके पति और देवर को अपने साथ काम दिलाने की बात कह कर ले गया था.

हादसे के बाद से माइनिंग सरदार फ़रार है.

शराफ़त अली की पत्नी साहिबा बेगम अपने एक बेटे और बेटी के साथ इसी घर में रहती हैं.

वो कहती हैं कि उनके पति पहली बार इस तरह का काम करने इतनी दूर गए थे. उनका कहना था कि बहुत मना करने के बावजूद भी वो बहकावे में आकर चले गए.

घटना की ख़बर उन्हें गाँव के लोगों ने आकर दी. इस घर में अब कोई दूसरा कमाने वाला नहीं है.

खदान में फंसे एक और मज़दूर रियाजुल के पिता सहर अली अपने बेटे को याद करते हुए कहते हैं कि उनके बुढ़ापे का सहारा कब घर लौटेगा. वो उसकी आस लगाए बैठे हैं लेकिन अभी तक उनको मायूसी का ही सामना करना पड़ रहा है.

ऐसे ही एक 'रैट होल' में काम कर चुके अब्दुल करीम अब अपाहिज हो गए हैं. खदान में काम के दौरान उनपर कोयले का बड़ा अम्बार आ गिरा था, जिस कारण उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गयी थी.

उनके बड़े भाई अब्दुल कलाम भी कसान के उसी कोयला खदान में फंसे हुए हैं.

बीबीसी से बात करते हुए अब्दुल करीम कहते हैं कि उनके इलाक़े में रोज़गार के साधन नहीं हैं. "खेती करना भी घाटे का सौदा है. अगर दूसरों के खेतों में काम करने जाते हैं तो दिहाड़ी 200 से 250 रुपए प्रति दिन के आसपास ही मिल पाती है."

"खदान में मज़दूरी ज़्यादा मिलती है. एक दिन का 3000 रूपए तक मिलता है. इसलिए लोग ज़्यादा पैसे कमाने वहां चले जाते हैं. जिस तरह चूहा अपना बिल बनाता है, यहाँ की खदानों में उसी तरह का काम होता है. इसलिए फंसे लोगों को बचाना बड़ी चुनौती है."